कैसे परीक्षा के तनाव को हराएं - exam tips for students in hindi

Exam tips for student / फेलियर के इस डर के भागो नहीं ,परीक्षाओं में स्टूडेंट्स के तनाव से बचाने के तरीके

आज आपको student के एक ऐसे विषय के बारे में बात करूंगा। जिसमे सभी छात्रों लिए एक Exam Tips भी होगी। मतलब एक ऐसा विषय जो हर स्टूडेंट के जीवन को प्रभावित करता है साथ ही इस विषय का ज्यादा प्रभाव exam के दिनों ज्यादा देखने को मिलता है तो इस लिए कुछ Exam Tips के साथ इस विषय की चर्चा करेगें। 
अपने बच्चों को सफल देखना कौनसे माता -पिता नहीं चाहेंगे। उनकी हर वक्त चाह रहती है की उनका बच्चा टॉप करे, उनका नाम रोशन करे और उनका आप के बारे में ये सब सोचना एक तरीके से सही भी है।


exam tips in hindi
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परन्तु ये चाह  गलत तब हो जाती है जब पेरेंट्स (माता -पिता ) बच्चे पर पढ़ने के लिए दबाव बनाना शुरू कर दें। पता है की हमारा बच्चा ज्यादा अंक नही ला सकता लेकिन फिर भी उन पर दबाव बनाया जाता है की तुम एग्जाम में टॉप करना है तुम्हे पहली रैंक हासिल करनी है। उन्हें उससे कोई फर्क नहीं पड़ता की हमारा बच्चा क्या करना चाहता ,उसे क्या पसंद है। सभी पेरेंट्स को ये कहना चाहता हु की आप अपनी चाह या इच्छा उन पर न थोप कर यह फोकस करे की जो आपका बच्चा करना चाहता है उसे वही करने दे (मेरे कहने का मतलब है की अगर वो अपनी लाइफ के लिए कुछ करना चाहता है तो ) उसे मोटिवेट करे ताकी वो अपना काम और अच्छे तरीके से कर सके। और फिर आप देखिए की जो नतीजे आएंगे वो आपकी उम्मीदों से भी कहीं बेहतर आएंगे। आइए जानते है की वो कोनसे तरीके है जो बच्चों में तनाव के कारण और इसके समाधान कर सकते है।

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ज्यादा अंक बनाने के तनाव को दिमाग से हटा दें, नतीजे बेहतर आएंगें 

हर वर्ष जब एग्जाम का मौसम (समय ) आता है। तब उस समय विद्यार्थियों में तनाव का होना लाजिमी है, लेकिन तनाव सिर्फ और सिर्फ ज्यादा अंक ला पाने का होता है जो उनके लिए डिमोटिवेशन का काम करता है जब अंको के बारे में ये सोच लिया जाये की अगर अंक नहीं तो कुछ नहीं तब उन विधार्थियो का तनाव खतरनाक मोड़ पर पहुंच जाता है। ऐसी परस्थिति को देख लगता है की अंक का महत्व ज्यादा है ,पर जिंदगी नहीं।

अंक को जिंदगी की नींव मानना गलत है
हर क्षेत्र के बच्चो की चाहता होती कि वह अपने क्षेत्र में टॉप करे जो अच्छी बात है, लेकिन कि हर एक बच्चा तो टॉप नहीं कर सकता ना और यह भी उतना ही बड़ा सच है। बंद आँख वाली इस अंको की दौड़ में आप क्या खो रहे हो ये आपको पता भी नहीं है। और इसके लिए उन सभी ( विद्याथियों और अभिभावकों ) यह समझ आना चाहिए की सिर्फ अंको को आधार मानना उनके (विधार्थियों ) लिए एक अच्छा विचार नहीं हो सकता है। अरे ! एक जीवन पहाड़ जितना बड़ा है उसे आप अंको की इस दौड़ तले दबा कर यूँ ख़राब नहीं कर सकते है मत होने दो इस दौड़ को अपने दिमाग पर हावी ये आपके जीवन के लिए कष्टकारी हो सकती है। अगर मन और दिमाग में एक सकरात्मकता लायी जाये और खुद पर एक विश्वास हो तो आप ये सभी उपलब्धियां आसानी से हासिल कर सकते हो परन्तु अंकों को दिमाग़ में रखे बगै़र ही आप ये कर पाओगे ।

'सफलता अंको से नहीं ,मेहनत के पंखो से मिलती है 

हाँ हमने ये मान लिया की अंक आपकी शैक्षणिक योग्यता को दर्शाते है और हमने ये भी मान लिया की ये आपको एक अच्छी नौकरी भी दिलवा सकते है परन्तु सिर्फ अंक आपकी प्रतिभा कतय नहीं हों सकते है और ये समझना भी हमारे लिए जरुरी है। आप जिस कार्य के लिए बने है उसे आपके अंक decide नहीं कर सकते है। अरे ! आप इस दुनिया के कोई भी सफल व्यक्ति को देख लीजिये उनमे से सभी ने टॉप नहीं किया हुआ है उनमे से कुछ तो ऐसे भी है जो कम पढ़ने के बावजूद भी आज उस सफलता के मुकाम को हासिल कर चूके है, जहां आप सब जाना सोचते। और ऐसा इसलिए हो पाया है क्योंकि उनका लक्ष्य अंकों पर नहीं था, बल्कि उनके अपने गोल पर था। इसलिए अच्छे अंक लाने की कोशिश जरूर करें, लेकिन यही अंतिम लक्ष्य न हो।

EXAM TIPS IN HINDI
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अपनी क्षमताओं की पहचान करें

" क्षमता "शब्द सुनने में बस एक शब्द सा लगता है परन्तु ताकत इतनी की जितनी आप सोच न सको। हाँ और ये क्षमता जो है वो आपके अंदर है आपको ये तो पता ही होगा की भगवान ने हर व्यक्ति को एक अद्वितीय क्षमता के साथ पैदा किया है, जो अंकों पर आधारित नहीं होती। अरे ! किसी भी परीक्षा के परिणाम आपके भविष्य को निर्धारित नहीं कर सकतें है परिणाम चाहे कुछ भी हो आपका फोकस सिर्फ आपके गोल पर ही रहेगा। और मेरी ये बात हमेशा याद रखिये की हर बच्चा पढ़ने में अच्छा ही हो, जरूरी नहीं है। वह अच्छे अंक प्राप्त कर  सके, ये भी जरूरी नहीं है। हर बच्चा आईआईटी, मेडिकल जैसी एग्जामो क्रैक कर डॉक्टर या इंजिनीअर बन जाये , यह भी जरूरी नहीं। जरुरी है तो सिर्फ ये की वो अपना कितना समय अपनी मेहनत को देता है। कितना वह पढता है , और वह उस पढ़े हुए को कितना समझ पता है।


अंको का तनावी रूप

छात्र जीवन में विभन्न प्रकार की परीक्षाए होती है जो उसकी क्षमता की परख के लिए करी या करवाए जाती है। यह भय का विषय नहीं है यह विषय है अपनी क्षमताओं को पहचानने का परन्तु परीक्षा बच्चो के लिए एक भय का विषय बन गया है जो हर बार उन्हें डरता और सताता  है और इसका कारण है दबाव , ज्यादा अंक प्राप्ति की भूख जो उन्हें तनाव में ला खड़ा करती है। और ये विषय सिर्फ उन्हें ही नहीं बल्कि उनके माता पिता को भी बहुत चिंतित कराता है।


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आजकल दसवीं और बारहवीं की परीक्षा को तो जीवन-मरण एक रुप माना जा रहा है। भविष्य का नाम ले ले कर बच्चो पर एक प्रकार से दबाव बनाया जा रहा है। मेरे अनुसार तो आपको ये कहना है की कृपया बच्चो के मत या यूँ कहे की उनके विचरो  को जानिए की वो क्या चाहते है। परीक्षा , पढ़ाई , अंक आदि सभी का ये रूप देखने के बाद तो ऐसा लगता है की ये सब एक भोझ है जिसके नीचे बच्चे दबते चले जा रहे है।


 मेरी सभी पेरेंट्स से एक निवेदन है की वो अपने बच्चो अत्यधिक ध्यान रखे ताकि आपके बच्चो को पढ़ाई भोझ न लगे। और उन के तनाव को पहचानने की कोशिश करे। कहीं ऐसा न हो की आप सिर्फ को पर दबाव डालते रह जाएँ और बच्चा आपने आने वाला उज्जवल भविष्य खो बैठे।

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कैसे पहचानें कि बच्चा तनाव ?
कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है की तनाव एक मानसिक असंतुलन है, जो बच्चो के काम करने की रूचि को बदलता , बच्चे के आचार और विचारो को बदल देता है पढ़ने की इच्छा व एकाग्रता में कमी लता है।  तनाव ग्रस्त बच्चे की ऊर्जा का स्तर लगातार घटता अक्सर कम ही देखने को मिलता है उनकी जिंदगी बिल्कुल अस्त-व्यस्त हो दिखाई पड़ती है और इन सब का कारण सिर्फ एक हैवो है तनाव। तनाव ग्रस्त बच्चो  में  क्रोध अत्यधिक दिखाए पड़ता है  वे बात-बात पर गुस्सा करना लगते है और यही उनकी आदत में भी शामिल हो जाता है। तनाव के चलते उनका व्यवहार भी खराब दिखाई देने लगता है। उनके अंदर नकारात्मकता उत्पन हो जाती है। वे डिमोटिवेट होने लगते है।  और ये सभी एक्टिविट्स ये दर्शाती है की वो बच्चे पढाई के तनाव में है।

क्या करें जिससे की अंक तनाव न लगे ?

अगर आप परेंट्स है तो ये जानना चाहेंगे की कैसे भी या ऐसा क्या करे की हमारे बच्चे अंको को तनाव न समझे?
तो मेरी बात सुनिये पहली तो आपकी जिम्मेदारी है की बच्चो को तनाव ना हो और वो जिम्मेदारी आप तभी पूरी कर सकते है  आप बच्चो पर पढ़ाई के प्रति किसी भी प्रकार का दबाव न बनाये। जब बच्चा एग्जाम के दौर से गुज़रे या जब बच्चे का एग्जाम हो तब अभिभावकों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण हो जाती है की उनकी पढ़ाई में कुछ मदद करे। अभिभावक उनके व्यवहार को समझे और यदि बच्चा तनाव में दिखे तो उचित समाधान कर उसका तनाव दूर करे , और इस प्रकार आप बच्चो को तनाव से दूर रख सकते हो।

मेरे विचार जो में परेंट्स को बताना चाहूंगा


बच्चो पर ये दबाव न बनाया जाये की उसे दिन में 18 से 20 घंटे सिर्फ पढ़ना ही पढ़ना है। उन्हें अच्छे लोगो और अच्छे विचारो के बारे में जानने के लिए प्रेरित करे उन्हें अपने मित्रों के साथ भी कुछ वक्त बिताने को दिया जाये।


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कई अध्ययनों से यह साबित हो चुका है कि फिजिकल एक्टिविटीज तनाव को कम करती है। तो पढ़ाई के बीच आप भी अपने बच्चे को शाम के समय कुछ देर के लिए  बाहर निकलकर खेलने व शारीरिक व्यायाम करने के लिए मोटिवेट करें। ताकि तनाव उस पर हावी न हो सके और वो शारीरिक व मानसिक रूप से मजबूत बन सके।

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में आशा करता हु की मेरे दुवरा लिखी गये कुछ एक्सपर्ट्स के एग्जाम टिप्स आपको पसंद आए होंगे। अगर पसंद आये है तो आप मुझे कमेंट कर बताएँ जिससे मुझे मोटिवेशन मिलेगा और में आपके लिए इस प्रकार स्टूडेंटस से जुड़ी कुछ बाते में आपको शेयर करता रहूँ। आप मुझे instagram ,facebook , linkedin and pinterest जैसी सीटों पर मुझे फॉलो कर सकते है में वहां भी कुछ कोट्स और स्टोरीस शेयर करता रहता हु तो ➽follow me
धन्यवाद 



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